Shayari...फिर छिड़ी रात बात फूलों की.....
फिर छिड़ी रात बात फूलों की रात है या बारात फूलों की फूल के हार, फूल के गजरे शाम फूलों की रात फूलों की आपका साथ, साथ फूलों का आपकी बात, बात फूलों की नज़रें मिलती हैं जाम मिलते हैं मिल रही है हयात फूलों की कौन देता है जान फूलों पर कौन करता है बात फूलों की वह शराफ़त तो दिल के साथ गई लुट गई कायनात फूलों की अब किसे है दमाग़े तोहमते इश्क़ कौन सुनता है बात फूलों की मेरे दिल में सरूर-ए-सुबह बहार तेरी आंखों में रात फूलों की फूल खिलते रहेंगे दुनिया में रोज़ निकलेगी बात फूलों की यह महकती हुई ग़ज़ल जैसे सहरा में रात फूलों की

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