Shayari.....तुझे फुरसत ना थी किसी अफ़साने को पढ़ने कि ......

तुझे फुरसत ना थी किसी अफ़साने को पढ़ने कि 💚"मन " तो बिकता राहा तेरे शहर में किताबों कि तरह.......

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