पलट कर देख कैसे लूँ.... कि तुम मेरे नहीं हो अब... ..... ... .. . जो अब मेरे नहीं हो तुम... पलट कर देख कैसे लूँ...
अल्फ़ाज़ गिरा देते हैं, ज़ज्बात की कीमत..... .... ... .. . जज़्बात को लफ़्ज़ों में ना ढ़ाला करे कोई....