Shayari......तलब - ये नहीं कि मैं तुम्हारा हो जाऊँ........

तलब - ये नहीं कि मैं तुम्हारा हो जाऊँ... ख़्वाहिश है तुम्हारी दुआ बनूँ और क़ुबूल हो जाऊँ.....

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